• पृथ्वी तथा चंद्रमा दोनों को प्रकाश सूर्य से मिलता है। पृथ्वी पर से चंद्रमा का एक ही भाग दिखाई देता है क्योंकि उनकी घूर्णन गति लगभग समान है। पृथ्वी से चंद्रमा का सम्पूर्ण प्रकाशित भाग महीने में केवल एक बार पूर्णिमा के दिन दिखाई देता है। इसी प्रकार महीने में एक बार अमावस्या को चन्द्रमा का सम्पूर्ण अप्रकाशित भाग पृथ्वी के सामने होता है और चंद्रमा दिखाई नहीं देता है।
• जब सूर्य, पृथ्वी तथा चंद्रमा एक सरल रेखा में होते हैं तो इस स्थिति को युति-वियुती या *सिजिगी (Syzygy)* कहते हैं, जिसमें युति (सूर्य एवं चंद्रमा पृथ्वी के एक तरफ होते हैं) सूर्यग्रहण की स्थिति में तथा वियुति (सूर्य एवं चंद्रमा के बीच पृथ्वी होती है) चन्द्रग्रहण की स्थिति में बनते है।
• चन्द्रग्रहण की स्थिति तब बनती है, जब पृथ्वी सूर्य एवं चंद्रमा के बीच आ जाती है; सूर्य की रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुँच पाती है तथा पृथ्वी की छाया के कारण उस पर अँधेरा छा जाता है।
• सूर्यग्रहण की स्थिति तब बनती है, जब सूर्य एवं पृथ्वी के बीच चंद्रमा आ जाती है तथा पृथ्वी पर सूर्य का प्रकाश न पड़कर चंद्रमा की परछाई पड़ती है।
• चन्द्रग्रहण हमेशा पूर्णिमा को एवं सूर्यग्रहण अमावस्या को होता है।
• एक वर्ष में अधिकतम सात बार सूर्यग्रहण व चन्द्रग्रहण हो सकते हैं, जैसा कि प्रत्येक पूर्णिमा एवं अमावस्या को क्रमशः चन्द्रग्रहण एवं सूर्यग्रहण नहीं होता है क्योंकि चन्द्रमा अपने अक्ष पर 5º का झुकाव लिए हुए है।
• सूर्यग्रहण के समय बड़ी मात्रा में पराबैंगनी किरणें उत्सर्जित होती हैं, इसलिए नंगी आँखों से सूर्यग्रहण देखने से मन किया जाता है।
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